संकल्प






"स्वराज्य से सुराज्य, सुराज्य से सशक्त सनातन"

हमारा ध्येय: लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की राष्ट्रवादी विरासत और छत्रपति शिवाजी महाराज के 'हिंदवी स्वराज्य' के सिद्धांतों को आत्मसात करते हुए एक अखंड, भयमुक्त और समरस सनातन समाज का निर्माण करना।

मुख्य संकल्प:

  1. संगठनात्मक शक्ति: भारत के प्रत्येक ग्राम, नगर और जिले में सक्रिय समितियों का गठन करना ताकि अंतिम छोर पर बैठे सनातनी भाई-बहन तक संगठन की शक्ति पहुँचे।
  2. सामाजिक समरसता: जाति-पाति के भेदभाव को मिटाकर संपूर्ण समाज को एक सूत्र में पिरोना और कुरीतियों के विरुद्ध जन-जागरण अभियान चलाना।
  3. गौ-वंश रक्षा: 'गौ-माता' के संरक्षण हेतु कत्लखानों के विरुद्ध कठोर नीति बनाना और अवैध रूप से कब्जा की गई गौचर भूमि को मुक्त कराना।
  4. सांस्कृतिक पुनर्जागरण: राष्ट्र के प्रत्येक कोने में 'श्री हनुमान चालीसा केंद्र' स्थापित करना, जिससे युवा पीढ़ी में साहस और भक्ति का संचार हो।
  5. न्याय और सुरक्षा: पीड़ित सनातनी परिवारों को त्वरित न्याय दिलाने हेतु एक 'लीगल सेल' और राज्य सरकारों के साथ समन्वय तंत्र स्थापित करना।
  6. स्वाभिमान और घर वापसी: उन सनातनी भाई-बहनों के लिए सम्मानजनक मार्ग प्रशस्त करना जो किन्हीं कारणों से अपनी जड़ों से दूर हो गए थे, ताकि वे सनातनी गौरव के साथ पुनः जुड सकें।