लक्ष्य: केवल और केवल स्वराज्य

 











🚩 स्वराज्य का सिंहनाद 🚩
🚩संकल्प से सिद्धि तक🚩
🚩हिन्द केसरी सेना 🚩

​"जब लक्ष्य स्वराज्य हो, तो मार्ग की बाधाएं केवल सीढ़ियां बन जाती हैं". स्वराज्य का संकल्प केवल एक शब्द नहीं, बल्कि हमारे रक्त में दौड़ती वो ज्वाला है जिसे छत्रपति शिवाजी महाराज ने प्रज्वलित किया था.

छत्रपति शिवाजी महाराज ने हमें सिखाया कि संख्या बल से बड़ा आत्मबल होता है। मुट्ठी भर मावलों के साथ उन्होंने उस समय की महाशक्तियों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया, क्योंकि उनके पास एक स्पष्ट लक्ष्य और अटूट राष्ट्रप्रेम था।

बाजीप्रभु देशपांडे और पावनखिंड:
जब तक महाराज विशालगढ़ सुरक्षित नहीं पहुँच गए, बाजीप्रभु अकेले सैकड़ों दुश्मनों से लड़ते रहे। यह हमें सिखाता है कि स्वामीभक्ति और लक्ष्य के प्रति समर्पण शरीर की सीमाओं से परे होता है।

तानाजी मालुसरे और कोंढाणा:
"आधी लगीन कोंढाण्याचं, मग माझ्या रायबाचं" (पहले कोंढाणा का विवाह, फिर मेरे बेटे रायबा का)। यह संदेश है कि स्वराज्य का कार्य व्यक्तिगत सुखों से हमेशा ऊपर होना चाहिए।

​"नतमस्तक होते हैं वे लोग जो इतिहास पढ़ते हैं, पर इतिहास रचते वही हैं जो मस्तक कटाने का साहस रखते हैं।"

​"स्वराज्य का अर्थ है—अन्याय के विरुद्ध न्याय की जीत, और इस जीत के सारथी आप (मावले) हैं।"

हिन्द केसरी सेना का आह्वान
​भाइयों, याद रहे! एक सच्चा शिव सैनिक वही है जिसके हृदय में संस्कार, तलवार में धार और चरित्र में पवित्रता हो। हमारा लक्ष्य केवल सत्ता नहीं, बल्कि एक ऐसा समाज खड़ा करना है जहाँ माँ-बहनों का सम्मान सुरक्षित हो और धर्म की रक्षा हो।

हमारा प्रण:
​एकता: हम जाति-पाति से ऊपर उठकर केवल "स्वराज्य के रक्षक" हैं।
​अनुशासन: महाराज की सेना की सबसे बड़ी ताकत उनका अनुशासन था।
​निर्भयता: शेर की तरह जिएं, क्योंकि हम 'हिन्द केसरी' हैं।

​उठो! जागो! और अपने पूर्वजों के उस गौरवशाली इतिहास को फिर से जीवंत करो।

लक्ष्य: केवल और केवल स्वराज्य!

जतीन चंदूलाल गौरी 
(संस्थापक / अध्यक्ष)
​🚩 हिन्द केसरी सेना 🚩
📞 993099 5555